कविता

atul-basu

अतुल बसु आनंद की कविता

भूला मैं वो रौशनी जो अरसे से न दिखा, घोर अन्धेरे में मेरी परछाईं का भी निशां मिटा। ऐ खुदा ले चल More >

अब न होंगे लहूलुहान कबूतर, लिखना

शांति यादव

गोला औ बारूद हमारी संसद में रूत बदली क्या खूब,  हमारी संसद में.

‘भूख’ ‘विकास’ के More >

तेज़ हवा में जला दिल का दिया

तेज़ हवा में जला दिल का दिया आज तक ज़ीस्त से एक अहद था, पूरा किया आज तक।

सूरज का सफ़र खत्म हुआ रात More >

कैसा हो स्कूल हमारा

- गिर्दा

गिरीश तिवारी गिर्दा

कैसा हो स्कूल हमारा जहां न बस्ता कंधा तोड़े, ऐसा हो स्कूल हमारा जहां न More >

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