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कविता
अतुल बसु आनंद की कविता
भूला मैं वो रौशनी जो अरसे से न दिखा, घोर अन्धेरे में मेरी परछाईं का भी निशां मिटा। ऐ खुदा ले चल More >
तेज़ हवा में जला दिल का दिया
तेज़ हवा में जला दिल का दिया आज तक ज़ीस्त से एक अहद था, पूरा किया आज तक।
सूरज का सफ़र खत्म हुआ रात More >
कैसा हो स्कूल हमारा
- गिर्दा
गिरीश तिवारी गिर्दा
कैसा हो स्कूल हमारा जहां न बस्ता कंधा तोड़े, ऐसा हो स्कूल हमारा जहां न More >