मुलाक़ात
हंस सर्वाधिक लोकतांत्रिक पत्रिका है – राजेन्द्र यादव
जाने माने कथाकार राजेन्द्र यादव के संपादकत्व में निकलने वाला ‘जन चेतना का प्रगतिशील कथा More >
ईश्वर अमूर्त भी है और बेईमान भी – कमलेश्वर
राजा निरबंसिया’ कहानी से रातों-रात लेखक बने कमलेश्वर ने कोई तीन सौ से ज्यादा कहानियां और दर्ज़न भर More >
लेखक और प्रकाशक के बीच लिटररी एजेंट होना चाहिए – अरूण माहेश्वरी
दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. तक की शिक्षा प्राप्त कर चुके अरूण माहेश्वरी वाणी प्रकाशन के More >
साहित्य के अलावे हिंदी में लिखने वाले लोग बहुत मुश्किल से मिलते हैं – महेश भारद्वाज
महेश भारद्वाज का जन्म 11 नवंबर 1963 को दिल्ली में हुआ. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक तक More >
राजनैतिक महिलाएँ मर्दों के ही खेल खेल रही हैं – नवनीता देव सेन
नवनीता देव सेन बांग्ला की सर्वाधिक चर्चित लेखिकाओं में से हैं. 65 वर्षीया नवनीता के लेखन का विस्तार More >
इतिहास, समाजशास्त्र और साहित्य की रिक्तताओं को भर रही हैं लेखिकाएँ – नवनीता देव सेन
नवनीता देव सेन बांग्ला की सर्वाधिक चर्चित लेखिकाओं में से हैं. 65 वर्षीया नवनीता के लेखन का विस्तार More >
ॐ, हाइमाट और घर – महज शब्द नहीं, पूरी संस्कृति हैं – नामवर सिंह
डा. नामवर सिंह हिंदी साहित्य के शीर्षस्थ आलोचक माने जाते हैं. हिंदी ही नहीं, संपूर्ण भारतवर्ष में More >
खूनी बुनियाद पर बने राम मंदिर में जाने में शर्म आएगी मुझे – अशोक वाजपेयी
तेरह वर्ष की उम्र में ही अशोक वाजपेयी ने तय कर लिया था कि उन्हें कवि बनना है. अशोक वाजपेयी के मन More >
कादम्बरी को कलि कथा का शेष मानना बिल्कुल उचित नहीं — अलका सरावगी
युवा कथालेखिका अलका सरावगी गत सप्ताह हिंदी के साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित की गई हैं। 1960 More >