teacher's day 2010 president

प्रतिभा पाटिल शिक्षक वासुदेव पंत को पुरस्कार देते हुए

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने शिक्षक दिवस के अवसर पर कल दिल्ली में वर्ष 2009 के लिए राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित शिक्षकों को सम्बोधित किया. इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षक दिवस पर आप सबके साथ शामिल होने पर वे अत्यधिक प्रसन्न हैं. यह दिन हम देश भर में अध्यापकों द्वारा किए जा रहे कार्य के साथ-साथ महान शिक्षाविद् एवं हमारे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के रूप में मनाते हैं.

प्रतिभा पाटिल ने कहा कि शिक्षकों का हमारे समाज में सदा विशेष स्थान रहा है और उन्हें आदर की दृष्टि से देखा जाता है, क्योंकि वे बच्चों को सक्रिय और जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करते हैं. यह एक आदर्श व्यवस्था है क्योंकि इसमें बच्चों को ज्ञान का अमूल्य उपहार देना शामिल है. प्रश्न उठता है कि ऐसे युग में जहां पुस्तकों में, टेलीविजन पर और असंख्य इलेक्ट्रानिक माध्यमों पर अपार जानकारी उपलब्ध है, तब शिक्षक की क्या भूमिका है. इस वातावरण में उनकी भूमिका का विस्तार किया गया है. उन्हें विशाल जानकारी या सूचना की व्याख्या करनी होती है, जिसमें अक्सर बच्चों का मार्गदर्शन करना होता है कि इसमें क्या प्रासंगिक है और क्या नहीं. यह महत्वपूर्ण है ताकि बच्चे अपार सूचना में खो न जाएं बल्कि उनका विश्लेषण करके अपने इर्द-गिर्द की घटनाओं की समझ विकसित कर सकें. इसके साथ-साथ शिक्षकों को अपने छात्रों में सभ्य मानव व्यवहार वाले सिध्दान्त और दृष्टिकोण विकसित करने चाहिए. यह कार्य आज की सर्वोत्तम प्रौद्योगिकी भी नहीं कर सकती. यही कारण है कि हमारे प्राचीन शास्त्रों में शिक्षकों को आचार्य कहा गया है, क्योंकि वे अगली पीढी क़ो आचार-व्यवहार की शिक्षा देते हैं. इस प्रकार शिक्षकों के लिए विचार और ज्ञान जो वे अपने शिष्यों को देते हैं, भी उतना ही महत्वपूर्ण होना चाहिए जितना कि आचार, जिसमें वे अपने शिष्यों को ढालते हैं. आज यह महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारा राष्ट्र आर्थिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है. ऐसे समय में आम तौर पर सहनशीलता समझबूझ और विभिन्न विचारों के लिए सम्मान जैसे मूल्यों में ठहराव पाया जाता है. हमारा एक बहुजातीय, बहु-धार्मिक और अनेकवादी समाज है. इसलिए युवाओं को चाहिए कि वे सभी को गले लगाने वाला दृष्टिकोण अपनाएं जो बांटने के बजाए उन्हें एकजुट करे. उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनना चाहिए.

प्रतिभा पाटिल ने आगे कहा कि यदि हमारे शिक्षक इस काम को ठीक ढंग से करें, तब समृध्दि के साथ-साथ हम एक ऐसा समाज तैयार कर सकेंगे, जिसमें एक दूसरे की चिन्ता की जाएगी और अन्यों के प्रति हम दयाशील होंगे. जैसा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा था कि शिक्षा का उद्देश्य मात्र जानकारी प्राप्त करना नहीं है बल्कि ऐसा दृष्टकोण विकसित करना है जो हमें जिम्मेदार नागरिक बनाए. वास्तव में व्यापक शिक्षा प्रणाली युवा पीढी क़ो ऐसे नागरिक बनाने में सहायता करेगी जिनका नीतिपरक आधार होगा और जिसमें सामाजिक दायित्व की मजबूत भावना होगी.

(प्रेस इंफॉरमेशन ब्यूरो के रिलीज के आधार पर)