Sharad Joshi

शरद जोशी
(1931-1991)

हिन्दी के जाने-माने  वयंग्यकार शरद जोशी का जन्म 21 मई 1931 को मध्यप्रदेश के उज्जैन में हुआ था. कुछ समय तक ये सरकारी नौकरी में रहे. शरद जोशी ने मध्य प्रदेश सरकार के सूचना एवं प्रकाशन विभाग में काम किया लेकिन लिखने की वजह से इन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी और लेखन को ही पूरी तरह से अपना लिया. उन्होंने अपने करियर की शुरूआत इन्दौर में रहते हुए अखबारों और रेडियो के लिए लेखन से की. इन्दौर में ही इनकी मुलाकार इरफाना सिद्दकी से हुई जिनसे उन्होंने बाद में शादी की. 5 सितम्बर 1991 को मुंबई में उनका निधन हो गया.

हालाँकि शुरूआती दिनों में इन्होंने कुछ कहानियाँ भी लिखी थीं लेकिन बाद में ये पूरी तरह से व्यंग्य लिखने लगे. 1951 से 1956 तक उन्होंने नई दुनिया के लिए लगातार व्यंग्य स्तंभ लिखा. उन्होंने टेलिविजन के लिए भी काफी कुछ लिखा. ‘ये जो है जिंदगी’, ‘विक्रम बेताल’, ‘सिंहासन बत्तीसी’, ‘वाह जनाब’, ‘देवी जी’, ‘प्याले में तूफान’, ‘दाने अनार के’ और ‘ये दुनिया गजब’ की धारावाहिक इनके द्वारा लिखे लोकप्रिय टेलिविजन धारावाहिकों में से हैं. इनकी कहानियों पर आधारित ‘लापतागंज’ धारावाहिक भी बनाई गई है. ‘क्षितिज’, ‘छोटी सी बात’, ‘साँच को आँच नहीं’, ‘गोधूलि’, ‘दिल है कि मानता नहीं’, और ‘उत्सव’ जैसी फिल्में भी उन्होंने लिखी. ‘तिलस्म’, ‘रहा किनारे बैठ’, ‘परिक्रमा’, ‘किसी बहाने’, ‘जीप पर सवार इल्लियाँ’,  ‘दूसरी सतह’, ‘प्रतिदिन’ इनकी प्रमुख कृतियाँ हैं. इन्होंने व्यंग्य नाटक भी लिखे हैं जिनमें ‘अंधों का हाथी’, ‘एक था गधा’ आदि महत्वपूर्ण हैं. ‘अतिथि तुम कब जाओगे’ फिल्म भी उनकी कहानी से प्रेरित फिल्म है. उन्होंने नई दुनिया, कादम्बरी, ज्ञानोदय, रविवार, साप्ताहिक हिन्दुस्तान, नवभारत टाइम्स जैसी पत्र-पत्रिकाओं के लिए काफी लिखा. नवभारत टाइम्स का ‘प्रतिदिन’ स्तंभ काफी लोकप्रिय रहा और यह लगातार सात साल तक चला.

1990में उन्हें पद्मश्री सम्मान प्रदान किया गया. मध्यप्रदेश सरकार ने उनके नाम पर शरद जोशी सम्मान आरंभ किया है.

— संगीता कुमारी