किताब – यूटोपिया

लेखिका – वन्दना राग

वर्ष – 2010

भाषा – हिन्दी

प्रकाशन -  राजकमल प्रकाशन

पृष्ठ – 184

बिहार के सीवान जिले की युवा लेखिका वन्दना राग जन्म की इन्दौर में हुआ था. उन्होंने 1990 में दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.ए. किया है. ‘यूटोपिया’ उनका पहला कहानी संग्रह है. उन्होंने ‘एज ऑफ कैपिटल’ का अनुवाद ‘पूंजी का युग’ शीर्षक से किया है. वे फिलहाल पुणे में रहती हैं. ‘यूटोपिया’ में कुल बाहर कहानियाँ ली गई हैं जिनमें ‘शहादत और अतिक्रमण’, ‘नमक’, ‘छाया युद्ध’, ‘टोली’, ‘यूटोपिया’ आदि प्रमुख हैं.

‘शहादत और अतिक्रमण’ कहानी के अंश:

उसने स्पष्ट देखा, रमेश सोनाने की आँखें चमक गईं. गाल, ठुड्डी समेत आश्चर्य मिश्रित प्रसन्नता से ऊपर उठ गया. उसने पहली बार ग़ौर से देखा, रमेश सोनाने का माथा कितना चोड़ा है!  उसके गालों पर हलकी-हलकी उगती दाढ़ी कितनी फबती है! फिर उसे अपने इस भाव पर तुरन्त शर्म हो आई. गाँव का लफंगा है यह तो, इसको इतने गौर से देखने की क्या ज़रूरत है? उसने मुँह दूसरी ओर कर लिया. उसे सुनाई दिया, रमेश सोनाने की आवाज़ में एक लरज़ पैदा हो गई थी. वह इस लरज़ को पहचानती थी. अजय प्रताप सिंह जब काँपती अँगुलियों से छूता था, उसके मुँह पर फैल आए बालों को पीछे धकेलता था, तब ‘ऐ जादूगरनी’ ऐसी ही लरज़ के साथ बोलता था. मुन्नी सिंह चकित रह गई, पति और लफंगे में इस लरज़ता में समानता कैसे?