भूला मैं वो रौशनी जो अरसे से न दिखा,
घोर अन्धेरे में मेरी परछाईं का भी निशां मिटा।
ऐ खुदा ले चल मुझे आशाओं के उस जहां,
जहाँ बुलंदी की जमीं हो और न हो दूजा आसमां।
हाँ ले चल तू उस जहां, ले चल तू उस जहाँ…
इस अड़चन का तू कर निवार, इस मझधार से करा दे पार,
टूट चुका मेरा संसार, अब तू ही है बस एक आसार।
अकेले चल सकता हूँ मैं , गिर के संभल सकता हूँ मैं,
तू बस दिखला दे रास्ता
हथेली की इन रेखाओं का नक्शा बदल सकता हूँ मैं ।
तू दिखला दे रास्ता, बस दिखला दे रास्ता…

बरस गयो बादल सारो, सोंधी खुशबू पास न आयो
दलदल बनत जात है सारो मिट्टी न इ रेत है भायो।
साहस ने हार मान ली अब मान का तू रख ख्याल ,
बरसा दे आस की किरण बनजा तू अब मेरी ढाल।