दूसरे स्थान पर है ‘पहल’ और तीसरे पर ‘तद्‌भव’

(लिटरेट वर्ल्ड का सन् 2003 सर्वेक्षण)

हिन्दी साहित्य की सर्वाधिक महत्वपूर्ण पत्रिका कथा मासिक ‘हंस’ है। दूसरी सबसे महत्वपूर्ण साहित्यिक पत्रिका ‘पहल’ और तीसरी ‘तद्‌भव’ है। लिटरेट वर्ल्ड द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण में यह तथ्य उभर कर आया है। हिन्दी प्रदेश के 81 व्यक्तियों से किए गए बातचीत के आधार पर यह तथ्य सामने आया है। हिन्दी से जुड़े लोगों-लेखकों को महत्वक्रिम में वरीयता के आधार पर वर्त्तमान समय की दो सर्वाधिक महत्वपूर्ण साहित्यिक पत्रिकाओं का नाम लेने को कहा गया था। इस सर्वेक्षण के 81 सैंपल में से 24 लेखक ‘हंस’ को सर्वाधिक महत्वपूर्ण पत्रिका मानते हैं जबकि 13 इसे दूसरी मुख्य पत्रिका मानते हैं। ‘पहल’ को 18 व्यक्ति पहले स्थान पर रखते हैं तो 10 दूसरे स्थान पर। इसी तरह ‘तद्‌भव’ को 8 लेखक पहला स्थान देते हैं तो 13 दूसरा स्थान। पत्रिका के नाम के चयन में आवधिकता का कोई बंधन नहीं था यानी लेखक मासिक, त्रैमासिक या अनियतकालीन किसी भी तरह की पत्रिका का नाम ले सकते थे।

प्रख्यात कथाकार राजेंद्र यादव के संपादकत्व में निकलने वाली ‘हंस’ मासिक पत्रिका है। गौरतलब है कि पहले पांच स्थान में सिवाय ‘हंस’ के कोई मासिक पत्रिका अपना स्थान नहीं बना पायी है। दूसरा स्थान पाने वाली अनियतकालीन ‘पहल’ कथाकार ज्ञानरंजन द्वारा संपादित है। ‘हंस’ जहां दिल्ली से निकलती है वही ‘पहल’ जबलपुर से। पिछले कुछ ही समय में खासा चर्चा में रही त्रैमासिक पत्रिका ‘तद्‌भव’, जो कथाकार अखिलेश के संपादकत्व में लखनऊ से निकलती है, ने सर्वेक्षण में तीसरा स्थान पाया है। कुछ ही समय में साहित्यिक जगत में इतनी पैठ इसकी बेहतर संभावनाओं को दर्शाती है। गौरतलब है कि पहले तीन स्थान पर आने वाली पत्रिकाओं में से तीनों के संपादक मूलतः कथाकार हैं।

सर्वेक्षण में इन तीन पत्रिकाओं के अतिरिक्त ‘आलोचना’ और ‘बहुवचन’ को लोगों ने महत्त्वपूर्ण पत्रिकाओं में रखा है। जहां दोनों पत्रिकाओं को पहली सर्वाधिक महत्वपूर्ण पत्रिका कहने वाले 6-6 लोग है वहीं ‘आलोचना’ को पांच सैंपल ने दूसरी सर्वाधिक महत्वपूर्ण पत्रिका माना है तो ‘बहुवचन’ को चार ही लोगों ने। इसके बाद ‘कथादेश’, ‘पूर्वग्रह’ और ‘वागर्थ’ तीनों एक साथ आए हैं। ‘साहित्य अमृत’ का नाम भी तीन लेखकों ने अपनी पहली पसंद के तौर पर शुमार किया है। राजकमल द्वारा प्रकाशित ‘आलोचना’ जहां प्रख्यात आलोचक नामवर सिंह के प्रधान संपादकत्व में निकलती है तो वहीं महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित ‘बहुवचन’ जाने माने कवि आलोचक अशोक वाजपेयी के प्रधान संपादकत्व में अब तक निकलती रही थी। ‘बहुवचन’ प्रथम पांच में आनेवाली एकमात्र ऐसी पत्रिका है जो किसी सरकारी संस्थान से निकलती है।

‘समयांतर’ हालांकि कथाकार पंकज बिष्ट द्वारा निकाली जाती है परंतु यह वास्तव में साहित्यिक पत्रिका न होकर समाचार विचार की पत्रिका है। लेकिन चूंकि यह साहित्यिक चर्चाओं को महत्वपूर्ण रूप जगह से देती है इसलिए इसके अन्य महत्वों को ध्यान में रखते हुए कथाकार उदय प्रकाश ने इसे वर्तमान समय की सर्वाधिक महत्वपूर्ण पत्रिका पाना है। ममता कालिया और कृपाशंकर चौबे ने ‘कथादेश’ को पहला स्थान दिया है तो नरेंद्र कोहली और रामशरण गौड़ ने ‘साहित्य अमृत’ को।

नामवर सिंह, विष्णु प्रभाकर, गिरिराज किशोर, पंकज बिष्ट, मैत्रेयी पुष्पा, रामधारी सिंह दिवाकर, अरविंद मोहन, भगवान दास मोरवाल, जयप्रकाश कर्दम, सुरेश सेठ सहित 24 व्यक्तियों ने ‘हंस’ को सर्वाधिक महत्वपूर्ण पत्रिका में पहला स्थान दिया है तो चित्रा मुद्‌गल, प्रियदर्शन, भगवत रावत, ममता कालिया, वीरेन्द्र यादव, रवींद्र कालिया, संजीव, गीता डोगरा, अरविंद चतुर्वेदी जैसे 13 लेखकों ने इसे दूसरा स्थान दिया है। इसी तरह ‘पहल’ का नाम पहली स्थान पर लेने वाले भी कई दिग्गज हैं- विश्वनाथ त्रिपाठी, राजेश जोशी, अरूण कमल, सृंजय, रवींद्र कालिया। उदय प्रकाश, नामवर सिंह, हरि नारायण, पंकज बिष्ट, विनोद शाही, मोहन थपलियाल आदि ने दूसरा स्थान इसे दिया है।

मनोहर श्याम जोशी, मृदुला गर्ग, वीरेन्द्र यादव, शिवमूर्ति आदि ‘तद्‌भव’ को पहला स्थान देते हैं। मैत्रेयी पुष्षा, अरूण प्रकाश, राजेंद्र यादव, नंदकिशोर नवल, कृपाशंकर चौबे आदि तद्‌भव को महत्वक्रिम के दूसरे पायदान पर रखते हैं। ‘आलोचना’ को पहला स्थान देने वाले नंदकिशोर नवल, खगेन्द्र ठाकुर, विनय दुबे, मोहन थपलियाल जैसे लेखक हैं। सौमित्र मोहन, ध्रुव शुक्ल, उदयन वाजपेयी, ज्योत्सना मिलन, ओम थानवी की प्रथम पसंद ‘बहुवचन’ है। मनोहर श्याम जोशी, अरविंद मोहन, सतपाल सहगल और रमेशचंद्र शाह को भी ‘बहुवचन’ पसंद है परंतु वे इसे महत्व क्रम में दूसरे स्थान पर रखते हैं।चूंकि लेखक अपने किसी भी पसंदीदा नाम को महत्वपूर्ण मानने के लिए स्वतंत्र थे इसलिए कई नाम उभरकर सामने आए हैं जिसे कम से कम एक व्यक्ति ने भी चुना है – ‘वसुधा’, ‘अकार’, ‘कला प्रयोजन’, ‘आजकल’, ‘गगनांचल’, ‘वर्त्तमान साहित्य’, ‘कसौटी’, ‘संधान’, ‘सनद’, ‘समकालीन भारतीय साहित्य’, ‘अक्षत’, ‘समय सुरभि’, ‘विपाशा’, ‘साक्षात्कार’, ‘पल प्रतिपल’, ‘कल्पना’, ‘कथन’, ‘जनमत’ आदि।

दिल्ली से राजेश रंजन और संगीता
साथ मेंः कोलकाता से पलाश विश्वास, पटना से कला राय, भोपाल से संगीता गुन्देचा, लखनऊ से शैलेन्द्र सिंह, लुधियाना से अंजलि काजल और देहरादून से मंजू मल्लिक मनु

(17 जनवरी 2003 को लिटरेट वर्ल्ड में प्रकाशित)