फादर कामिल बुल्के
बेल्जियम मूल के फादर कामिल बुल्के का जन्म 1 सितम्बर 1909 को फ्लैंडर्स स्टेट के रम्सकपैले गांव में हुआ था. यूवेन विश्वविद्यालय से अभियांत्रिकी की पढ़ाई के उपरांत वे 1935 में भारत आए. वहाँ से वे राँची और फिर झारखंड के गुमला जिले के इग्नासियस विद्यालय में गणित के अध्यापक हो गए. उन्होंने वहीं भारतीय भाषाएँ सीखनी शुरू कीं. कुछ वर्षों बाद पंडित बदरीदत्त शास्त्री से हिंदी और संस्कृत सीखने के बाद 1940 में विशारद की परीक्षा उन्होंने हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग से उत्तीर्ण किया. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एमए उन्होंने 1949 में किया. उन्होंने भारत की नागरिकता 1950 में ग्रहण की. 1950 में ही वे सेंट जेवियर्स कॉलेज में हिंदी व संस्कृत का विभागाध्यक्ष बनाए गए.
वे बिहार राष्ट्रभाषा परिषद् की कार्यकारिणी के सदस्य भी सन पचास में ही चुने गए. वे 1972 से 77 तक भारत सरकार की केन्द्रीय हिन्दी समिति के सदस्य रहे. 1982 में 17 अगस्त के दिन दिल्ली में बीमार होने के कारण मृत्यु हो गई. कामिल बुल्के ने ‘रामकथा : उत्पत्ति और विकास’ पर डीफिल किया. उन्हें भारत सरकार द्वारा 1974 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. सन् 1973 में बेल्जियम की रॉयल अकादमी का सदस्य बनाया गया.
उनकी प्रमुख कृतियों में हैं : ‘रामकथा : उत्पत्ति और विकास’, ‘अंग्रेजी-हिंदी शब्दकोश’, ‘मुक्तिदाता’, ‘नया विधान’, ‘हिंदी-अंग्रेजी लघुकोश’, ‘नीलपक्षी’, ‘बाइबिल’ (हिंदी अनुवाद). उनके द्वारा तैयार किया ‘अंग्रेजी-हिंदी शब्दकोश’ आज भी प्रामाणिकता और उपयोगिता की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ माना जाता है.
— संगीता कुमारी
